तिब्बत देश का असली नाम " बोद " ( Bod ) है

तिब्बत देश का असली नाम " बोद " ( Bod ) है। आज भी तिब्बती लोग अपनी मातृभूमि को " बोद " ही कहते हैं। " बोद " दरअसल " बुद्ध " का परिवर्तित रूप है।

" बोद " का एक परिवर्तित रूप " भोट " है। इसीलिए तिब्बती भाषा को " भोटी / भोटिया " कहते हैं।

भोट ( बोद ) लोग भूटान में भी रहते हैं। इसीलिए वह भूटान है। कनिष्क ने बुद्ध को " बोदो " ( Boddo ) लिखा। तिब्बत वालों ने " बोद " ( Bod ) लिखा।

तिब्बत और भूटान दोनों बौद्ध देश हैं और दोनों देशों के नाम बुद्ध के नाम पर पड़ा है।

बुद्ध के व्यक्तित्व में वो जादू था कि कई देशों ने अपना नाम बुद्ध के नाम पर रख लिए।

कहाँ थे और कहाँ आ गए!!!

बुद्ध के व्यक्तित्व में वो जादू था कि कई देशों ने अपना नाम बुद्ध के नाम पर रख लिए। कहाँ थे और कहाँ आ गए।

तिब्बत नाम चीन द्वारा आरोपित है।
Rajendra Prasad Singh सर जी तिब्बती भाषा को ब्योद् कहा जाता है द जो आधा रहता है उसका उच्चारण ना के बराबर होता है
बुद्ध = बोद = ब्योद् = भोट = भोटिया।

भोट/ भोटिया वास्तव में " बुद्ध " का परिवर्तित रूप है।
तब तो सर, असम में अलग राज्य की माँग की खातिर जो बोडोलैंड विवाद उभरा, वो #बोडो शब्द भी इसी संदर्भ में है?
 तिब्बत भी असम का पड़ोसी ही है,  वहाँ रहनेवाले लोग बुद्ध के अनुयायी 'बौद्ध' ही है। 
यानि साबित हुआ कि वे 'बोडो/ बोडो समुदाय' ही #बौद्ध के पर्याय हैं।

हमारे हिमाचल के जिला कुल्लु ( मनाली ) मे हिन्दू देवी देवताओं के जयादातर रथों में बुध की मूर्तियां लगी होती है "पूछे जाने पर बताया जाता है कि ये भोट भोटनी है.

शानदार खोज के लिए बहुत बहुत साधुवाद आपको.

हमारे यहाँ तिब्बती समुदाय को अभी भी भोटिया और उनकी मार्केट को भोटिया मार्केट कहा जाता है।
हम लोग देहरादून में पिछले सात सालों से हिमालन बुध्दिस्टो के साथ मिलकर संयुक्त रूप से बुध्द पूर्णिमा को सैलिब्रेट करते हैं।

सर..  तो क्या पाली भाषा का सम्बन्ध भी नेपाल से है?
एक संदेह है । भूटिया और लेपचा जनजातियां हैं, कबीले हैं (उत्तर पूर्व में)। बोडो भी जनजाति है । भूटिया जाति से भूटान का जुड़ाव होना ज्यादा सहज लगता है ।

"बोडो लैंड" की जो मांग है भारत मे, क्या यह शब्द भी बुद्ध से रिलेटेड है ??
Kumar Ramesh जी बोडो भी उसी समुदाय की भाषा है।

Kumar Ramesh ji बुद्ध से  सम्बन्ध नहीं है यह मांग।
पूर्वोत्तर भारत के लोगों पर बुद्ध का असर रहा है।
इसी तरह चटगोंग के चकमा लोग भी बुद्ध का सम्मान करते है।बुद्ध को चीन के लोग भी मानते है।बुद्ध को मानना अलग बात है। राष्ट्र भावना अलग चीज है।
ऐसे तो नेपाल में भी हिन्दू धर्मावलंबी है लेकिन इस वक़्त भारत सम्बन्ध अच्छे नहीं।
धर्म अलग  है राष्ट्र अलग है

कवि विक्रम भारतीय मैंने सिर्फ भाषा के दृष्टिकोण से सवाल पूछा
कवि विक्रम भारतीय 

क्षमा के साथ बीच में लिख रहा हूं! धर्म और राष्ट्र की परिभाषा अलग होगी लेकिन व्यवहार में आज दोनों एक दूसरे के मुंह पर पर्दा डालकर भारतीयता पर कीचड़ उछल कर मुस्कुरा रहे हैं।

कवि विक्रम भारतीय Dekho Bhai bhalehi aaj aisa lagata hoga ki boddo buddhse sambandhit Nahi kyuki buddh bhula diye Gaye hai Jaise tirupatike balaji badrinath ji pandharpurke vitthal ayappa inse buddh bhulake Vishnu laye Gaye hai vaisahi boddo se hua hai dusari batchitgong me chakma Buddhist Lok svabhimani Buddhist hai lekin chitgong purv bangaladeshme hai udhar bahusankhyak Muslim hone ke Karan unki rashtrabhavana bauddha Nahi muslim.hi hogi na vaisehi napal Jo hai bhalehi vo khudko Hindu manta ho lekin unka aur vaise bhartiyokabhi hindutva vaidik Nahi balki vajrayani mahayani bauddha hindutva hai bhalehi vo vikrut ho kyuki agar vo vaidik hindutva hota to sare hinduoka upnayan janeu sanskar hota munj Hoti ye na honeke Karan vo vaidik Nahi bramhanikaran unpe thopa Gaya hai

Very good भारत को फिर बाद में बौद्ध माय भारत क्यों नहीं कहा गया

भोटी और पालि में कोई साम्य है क्या? भोटी , संस्कृत से तो काफ़ी मिलती है।

आपकी  खोज और शोध
तथ्य .. तर्क...सत्य पर आधारित है..
इसलिए नयी दृष्टि से सोचने विचारने को मजबूर करती है..
  सत्य का अन्वेषण करते रहें
दुनिया के सामने नये दृश्य उभरकर सामने आयेगा..

कवि विक्रम भारतीय बोडो भी भुटीया वंशके  है.राजबण्शी आदिवासिजो की बंगाल त्रिपुरा आसाम मे रहाते है वो भी बर्मा म्यानामार से आये हुय है

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