" विक्रमशिला बौद्ध विहार "
भारतीय इतिहास में किसी राजा ने वीरता के कारण " विक्रमादित्य " और किसी ने शील के कारण " शिलादित्य " की उपाधि धारण की.....
लेकिन पाल नरेश धर्मपाल ( 770 - 810 ई. ) ने विक्रम और शील की ज्वाइंट उपाधि " विक्रमशील " धारण की...
विक्रमशील की इसी उपाधि के कारण उन्होंने " विक्रमशिला बौद्ध विहार " की स्थापना की थी....
निश्चित धर्मपाल वीर भी थे और शीलवान भी थे। तभी तो एक ओर मजूमदार ने उन्हें 100 युद्धों का नायक तो दूसरी ओर तारानाथ ने उन्हें 50 विद्यालयों का संस्थापक बताया है.....
अभिलेखों में धर्मपाल को " परम सौगत " कहा गया है....
परम सौगत क्या है?
बुद्ध का एक नाम सुगत है... जिस प्रकार बुद्ध से बौद्ध बना, उसी प्रकार सुगत से सौगत बना...
इस प्रकार परम सौगत का अर्थ " परम बौद्ध " हुआ....
धर्मपाल परम बौद्ध थे, बड़े उत्साही बौद्ध थे, 40 बरसों तक अकेले पूरबी भारत में धम्म - ध्वज फहराते रहे।
Rajendra Prasad Singh ...नमो बुद्धाय जी।।आपका आभार।।।भाषा के चक्रव्यूह से इतिहास को पहचाना आपकी विद्वता अदभुत हैं।।।
सर यह तो विक्रमशिला युनिवर्सिटी हो गया फिर तो?
बहुत ही अच्छी जानकारी सर। विक्रमशिला विश्वविद्यालय भी तो था या विक्रमशिला विहार ही बाद विश्वविद्यालय कहलाया या बना दिया गया।जिसका संबंध ग्वालियर से था।
खोए हुए बुद्ध की बौद्ध संस्कृति का परिचय जानकर हम आजीवन आपके ऋणी रहेंगे।
हमारे पूर्वज बुद्धिस्ट थे
इन पर अत्याचारों से हिन्दू धर्म , जातियां, इस्लाम थोपा गया।
सबूत
अशोक के शासनकाल में बौद्ध धर्म का प्रसार
https://commons.m.wikimedia.org/wiki/File:Buddhist_Expansion.svg#mw-jump-to-license
https://youtu.be/k4cFwDzLS5Y
भारत का असली तार्किक सच्चा इतिहास
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