पब्लिक इंटेलेक्चुअल!
पब्लिक इंटेलेक्चुअल!
पब्लिक इंटेलेक्चुअल के जितने सिद्धांत हैं, जितनी कसौटियाँ हैं.....
बुद्ध सब पर खरे हैं।
बुद्ध ही भारत के पहले " पब्लिक इंटेलेक्चुअल " हैं।
अवतार के भोथरे औजार से बुद्ध का मूल्यांकन असंभव है.....
नए एज में " पब्लिक इंटेलेक्चुअल " के नजरिए से बुद्ध को देखे जाने की जरूरत है।
उपदेश मुद्रा में बुद्ध हैं। मूर्ति का मिलान कीजिए। महावीर और बुद्ध के संदेह में मत पड़िए।
Sir यह मूर्ति बुद्ध की है? या महावीर स्वामी जी
बुद्ध की मूर्ति पर चीवर होता है मूर्ति को ध्यान से देखने पर चीवर स्पष्ट होता है।
Aditya P Maitreya जी चीवर ही तो नहीं है।
देखिए फिर से, हाथ और गले पर।पैरों पर भी।इसके अतिरिक्त औरा के दोनों ओर के एविल्स भी बुद्ध मूर्ति की पहचान हैं।Vinod Kumar एविल यानी मार!
100% बुद्ध की है। अब ये उपदेश मुद्रा में बुद्ध की पूरी मूर्ति देखिए। सारनाथ की घटना को चित्रित किया गया है।Aditya P Maitreya ये सारनाथ में सबसे पहले बनाए गए पांच शिष्यों को देशना दे रहे हैं
Prem Prakash ये सबसे पहले बनाए गए शिष्य नहीं थे, उरुवेला में इनके शिष्य थे, इसके अतिरिक्त मृगदाव आते समय भल्लिक एवं एक और (?) जो आज के म्यामांर के व्यापारी भाई थे उनको दीक्षा दी थी, हाँ ये बात अवश्य है कि उस समय उन्हें सिर्फ बुद्ध और धम्म की ही दीक्षा मिली थी संघ की दीक्षा नहीं मिली थी क्योंकि उस समय संघ विद्यमान नहीं था, उन व्यापारी भाइयों को स्मृतिस्वरूप बुद्ध ने अपने बाल दिए थे जिन पर उन भाइयों ने अपने राष्ट्र लौटकर एक भव्य स्तूप बनवाया।
अवतार के भोथरे औजार से बुद्ध का मूल्यांकन असंभव है...नए एज में " पब्लिक इंटेलेक्चुअल " के नजरिए से बुद्ध को देखे जाने की जरूरत है।
Rajendra Prasad Singh महाराष्ट्र में अवतार को नही मानते,,
डॉ बाबासाहेब आंबेडकर लिखित " बुध्द और उनका धम्म" को ही माना जाता है बजाय त्रिपिटक से
सारनाथ में धम्म चक्क पावतन
पब्लिक इंटेलेक्चुअल यानी जन-बुद्धिजीवी।
शायद यह समाज-शास्त्र के सिद्धांतों में से एक है।
इन सिद्धांतों पर प्रकाश डालें तो पोस्ट को समझने में आसानी हो।
संभवतः बुद्ध दुनिया के पहले महा पुरुष थे जो पब्लिक इंटेलेक्चुअल से परिपूर्ण थे.
बुद्ध की एकमात्र ऐसे वैज्ञानिक हैं जिन्होंने चित्त और शरीर (चेतन अवचेतन) का शोध करके मानव मुक्ति का रास्ता प्रशस्त किया
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