गुजरात का प्राचीन नाम लाट देश था....

गुजरात का प्राचीन नाम लाट देश था....

सम्राट अशोक के लाटों ( स्तंभों ) के कारण गुजरात का नाम लाट देश पड़ा था...

इसी लाट देश से साहित्य में लाटानुप्रास आया है....
इस तथ्य से गुजरात पर सम्राट अशोक के प्रभाव को समझा जा सकता है...

"सम्राट अशोक : नया परिप्रेक्ष्य" के गुजराती अनुवाद का कल व्यारा ( गुजरात) के सर्किट हाउस में विमोचन होगा....
अनुवाद, प्रकाशन और विमोचन का सारा श्रेय डाॅ. अरविंद अरहंत को है....
डाॅ. अरविंद अरहंत को बधाई एवं शुभकामनाएँ....

सम्राट अशोक: नया परिप्रेक्ष्य का नया नाम सम्राट अशोक का सही इतिहास रखा गया है और अब इसी नाम से किंडल पर ई - बुक के रूप में उपलब्ध है।

लाटानुप्रास एक अलंकार है....अनुप्रास अलंकार का एक भेद....यह शब्दों में होता है...इसके प्रयोग से काव्य का सौंदर्य बढ़ जाता है। संस्कृत के आचार्यों ने बताया है कि यह अलंकार साहित्य में लाट देश से आया है।

लाट साहब का संबंध अंग्रेजी लाॅर्ड ( Lord ) से है।
धन्यवाद...

सम्राट अशोक का सही इतिहास..

सम्राट अशोक  : नया परिप्रेक्ष्य 
का नया नाम..

राजस्थानी (विशेषतः मारवाडी़/गुजरात व पड़ोसी क्षेत्रों में) एक कहावत भी है सर कि:-

"तूँ काँई लाटसाहब है?"
यानि, 
(तुम क्या कोई बड़े ओहदेदार हो?)

स्तंभ को हमारी बोली में लाट कहा जाता है


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