आषाढ़ पूर्णिमा को पहली बार शिष्यों को गुरु पद से सारनाथ में सार्वजनिक ज्ञान दिया था.... इन्हीं के नाम पर गुरु पूर्णिमा है।
विश्वगुरु बुद्ध ही थे... इन्होंने ही आषाढ़ पूर्णिमा को पहली बार शिष्यों को गुरु पद से सारनाथ में सार्वजनिक ज्ञान दिया था.... इन्हीं के नाम पर गुरु पूर्णिमा है।
गुरु पूर्णिमा की गरिमा को भारत समझने लगा है....देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने गुरु पूर्णिमा - 2020 की बधाई दी है ...और बुद्ध के दिए ज्ञान को आत्मसात करने की बात कही है।
विश्वगुरु ने जिस दिन ज्ञान पाए, वह बुद्ध पूर्णिमा है और जिस दिन ज्ञान दिए, वह गुरु पूर्णिमा है।
विश्वगुरु को पहली बार सार्वजनिक ज्ञान देने का बतौर अंग्रेजी महीना जुलाई है...इसी माह में बौद्धों का वर्षावास आरंभ होता है...पठन - पाठन का दौर शुरू होता है।
भारत के विश्वविद्यालयों में जुलाई से पठन - पाठन का नया सत्र प्रारंभ होने का रिवाज़ की जड़ यहीं बुद्धिस्ट परंपरा है।
बधाई गुरु पूर्णिमा!
आज गुरु पूर्णिमा है। बौद्ध ग्रंथों के अनुसार गौतम बुद्ध ने सारनाथ पहुँचकर आषाढ़ पूर्णिमा के दिन अपने प्रथम पाँच शिष्यों को सर्वप्रथम शिक्षा प्रदान की थी। वह दिन आज है। इसे धम्म - चक्क - पवत्तन कहा जाता है।
बौद्ध परंपरा में आषाढ़ पूर्णिमा से वर्षावास प्रारंभ होता है और आश्विन की पूर्णिमा को समाप्त होता है। इसलिए इसे चातुर्मास भी कहते हैं। चातुर्मास में वर्षावास 3 महीने का होता है।
वर्षावास ( वस्सावास ) में बौद्ध भिक्षु किसी एक बौद्ध विहार में रहकर अध्ययन - अध्यापन करते हैं, ध्यान - साधना करते हैं। फिर वर्ष के शेष महीनों में चारिका के लिए निकल पड़ते हैं।
पालि में वस्स का अर्थ साल भी होता है, वर्षा भी होता है। तब वर्षाकाल से ही वर्ष की नाप होती थी। इसीलिए वस्स का अर्थ साल और वर्षा दोनों होता है। वर्ष इसी वस्स का अपभ्रंश है।
विश्वगुरु गौतम बुद्ध को गुरु पूर्णिमा के दिन नमन!!!
स्पष्टीकरण : - आषाढ़, सावन, भादों और आश्विन - कुल मिलाकर 4 महीने होते हैं। इसे चातुर्मास कहते हैं। इसी चातुर्मास में 3 महीने का वर्षावास होता है।Rajendra Prasad Singh सर क्या सुत्तो को रखने या रक्षा करने या प्रतिवर्ष विवेचना करना सावन के पूर्णिमा से शुरू होने पर रक्षासुत ही रक्षाबंधन है । शरद पूर्णिमा के दिन खीर बनाना कहीं वर्षावास के बाद भिक्षुओं के चारिका के सम्मान में ही है ना। सब कुछ तो बौद्ध दर्शन से जुड़ा है फिर समाज परालौकिक शक्ति को कैसे मानने लगा ।इस बारे में कुछ बतातें,सर ।।
सावन का महीना क्या है?
प्राकृत में सावन के दो अर्थ हैं - 1. माह सावन 2. धम्म सावन। माह सावन का अर्थ है - आषाढ़ और भाद्रपद के बीच का महीना। धम्म सावन का अर्थ है - बौद्ध सुत्तों का पाठ एवं श्रवण।
बौद्धों का वर्षावास आषाढ़ पूर्णिमा से आरंभ होता है और अगले दिन से पूरे सावन माह बौद्ध सुत्तों का सावन होता है, जिसे धम्म सावन कहा जाता है। धम्म सावन और माह सावन एक - दूसरे से जुड़ा है।
सम्राट अशोक ने धम्म सावन में बदलाव किए, अधिकारी नियुक्त किए तथा बड़े पैमाने पर धम्म सावन का कार्य जारी किए।
प्राकृत के सावन से संस्कृत के श्रावण का विकास हुआ।
जिस माह में बौद्ध सुत्तों को सावन किया जाता था अर्थात सुना / सुनाया जाता था, वहीं सावन है
Rajendra Prasad Singh ।।।आपको बहुत बहुत साधुवाद जी।।।जिस तरह से सावन सम्पूर्ण धरा को हरित करता हैं नव जीवन का आगमन होता हैं उसी प्रकार सावन में धम्म की चर्चा करके सम्पूर्ण मानव जाति प्रफुल्लित बुद्धमय बनती हैं।।।आओ बुद्ध की तरह लौटे
धम्म को जाने
संघ को संगठित करें।।।
आपका आभार डॉ साहब।।।।।आपका आभार।।।।
भारत मे बहरे लोगो को श्रवण की उपाधि क्यो मिली है?
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