कोलियकुलभूषण महामोग्लान
कोलियकुलभूषण महामोग्लान!
स्थविर महामोग्लान का गृहस्थ नाम कोलित्त था। कोलित्त अर्थात कोलिय गुणों से ओत-प्रोत। कोलित्त गौतम बुद्ध के प्रधान शिष्यों में से एक थे। इनका गाँव नालंदा के सारिपुत्त स्तूप के आस-पास था।
बुद्ध के समकालीनों में जिन शिष्यों ने बौद्ध धम्म के प्रचार-प्रसार में सर्वाधिक भूमिका अदा की, उनमें महामोग्लान का नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित है। ये तथागत के अग्रणी धम्म प्रचारकों में ऐसे शुमार थे कि तथागत के विरोधियों ने एकदम से बुढ़ापे में 84 साल की उम्र में इनकी हत्या करा दी।
साँची के एक स्तूप से इनके अस्थि - अवशेष एक पत्थर के बने मंजूषा से मिला है। मंजूषा के ढक्कन पर लिखा है - महामोग्लानस! RP Singh
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