सोए हुए लोग जगे हुए आदमी को बर्दाश्त नहीं करते....
सोए हुए लोग जगे हुए आदमी को बर्दाश्त नहीं करते....
क्योंकि जगा हुआ आदमी कुछ खटर - पटर करते रहता है.....
और सोए हुए लोगों की नींद में खलल डालता है....
मात्र तीन पंक्तियों में आपने समग्र समाज की अवस्था का सार प्रस्तूत किया हैं...
लेकीन जगे हूए लोगों को हमेशाही कीछ ना कुछ खटर - पटर करते रहना चाहिए ता की सब की नींद टूटे और एक सुनहरा सवेरा देखने के लिए सब लोग जाग जाए, यह जगे हूए लोगों का कर्तव्य होता हैं. जगे हूए व्यक्ती को इस कार्य के बदले सो रहे लोगों से ही बहूत बार गालियाँ सुननी पडती हैं और कभी कभी तो मार भी खानी पडती हैं... लेकीन उसको अपना कार्य रोकना नहीं चाहीए, क्यूँकी एक बार कोई जाग जाए और उसको इस बात का अहसास हो तो वो ( जो पहले जगाने वाले को गालीयाँ देता था ) खूद जगाने वाले के ना सिर्फ आभार मानेगा बल्की वह भी सोए हूए लोगों को जगाने के इस कार्य को आगे बढा़एगा... यह शृंखला टूटनी नही चाहिए. अगर जगा हूआ व्यक्ती अपना कार्य रोक देगा और यह शृंखला टूट जाएगी तो सोया हूआ कोई व्यक्ती काली घनी रात की खाई से जागृत हो कर सुनहरी सुबह का आनंद ले कर एक ताज़गी भरा दिन नहीं जी पाएगा... अभी आप इस शृंखला में एक और कडी़ जोड़ने का काम कर रहे हैं... दिन के तेजस्वी उजालें में भी नींद की गहरी खाई में सो रहे अनगीनत लोगों को जगाने कार्य आप कर रहे हों...
सोए हुए आदमी को उसके अस्तित्व या समाज के अस्तित्व की बात भी करना चाहो तो बड़े अनमने ढंग से सुनता है और चाहता है सुनाने वाला तुरन्त चला जाय और उसे सोने दे आराम से।
सोनां आराम की अवस्था है उसमें अच्छा लगता है।उससे इतर नींद में खलल से बहुत कष्ट होता है।बस आराम की अवस्था चलती रहे।
समाज सोया हुआ है उसपे बाहर वाले धर्म की अफीम और पिला कर मस्त कर रहे है नींद और अच्छी लग रही है।इससे बेखबर सब लुटा जा रहा।लुटेरे हर तरह जल बनाकर लूटे ले जा रहे है।हम किसी की अब भी प्रतीक्षा में कि कोई चमत्कार होगा या अवतार जन्म लेगा और जगायेगा।
अवतार बार बार जन्म नही लेते।अब अम्बेडकर फुले कांशीराम जी शाहू जी नही आएंगे।
अत्त दीपो भव बनना पड़ेगा स्वयम को।
जागो ,नही बहुत देर हो जाएगी।पहले से ही बुद्ध अम्बेडकर की पूंजो खो चुके हो।
बहुत ही शानदार और अपने समाज के सोये हुये लोग तथा जागे लोगो के बारे मे बड़े ही कम शब्दो में और अत्यंत सटिक शब्दों मे बताये है। जागे लोगों को सोये लोगों को जगाने की चिन्ता रह्ती ह पर सोये लोगों को हमेशा जागे लोगों से परेसानी होती है।
"जो समाज को जगाता है वो कभी धोखा करता नहीं , जो धोखा करता है वो समाज को कभी जगाता नहीं !
मा. वामन मेश्राम
बिल्कुल सही सोते हुए जगाना और समझाना बड़ा मुश्किल है चाहे उसका परिणाम कितना भी बुरा क्यों ना हो । लेकिन फिर भी समाज की जिम्मेदारी है ऐसे सोते हुए को जगाना ।
बहुजन समाज के चेतन मन का सार आपने बस 3 वाक्यों में पूरा लिख दिया। सादर नमन।
जी , सही बात है । विश्वसनीय राजनीतिक पार्टी शोषित समाज दल यही सोये हुए लोग के जगाने के कारण ही कुर्सी के दलालों के बीच उपेक्षित है न ।
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