विवाद होता क्यों है./जिंदगी है तो समस्याएं बनी रहेगी ।
विवाद होता क्यों है./जिंदगी है तो समस्याएं बनी रहेगी ।thought
विवाद होता क्यों है.
भक्त रहें, निर्वैर रहें यानी किसी से शत्रुता न रखें और अपने सारे वाद विवाद मिटा लें।
विवाद होता क्यों है, एक ही कारण है अज्ञान। सबसे बड़ा अज्ञान है अपने आप के मूल को
भूल जाना। दुनियाभर की जानकारी हो और यदि खुद को न जाना तो समझ लें हम अज्ञानी
ही हैं।श्रीचन्द्रजी ने एक जगह बड़ी बारीक बात कही है।
मन तो जोति सरूप है, अपना मूल पछाणा
अपने मूल को पहचानते ही अज्ञान का पर्दा हटेगा। ज्ञान अपने आप प्रकाशित होगा,
क्योंकि मन भी ज्योति स्वरूप है। जो मन पतन का कारण होता है वही उत्थान का माध्यम
भी बन सकता है।
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जिंदगी है तो समस्याएं बनी रहेगी ।
समस्याएं हमेशा के लिए समाप्त हो जाएं, इसमें पूरी ताकत झोंकने से अच्छा है कि समाधान की कला सीखने में ऊर्जा लगाई जाए। समाधान का ही एक नाम है उपाय। आपको सांसारिक समस्याएं निपटानी हो या आध्यात्मिक, उपाय की आवश्यकता जरूर पड़ेगी। सबके अपने-अपने इलाज हैं , तरकीब और तरीके हैं। स्कंद पुराण के अवंति खंड में चलते हैं। यहां श्रीसत्यनारायणव्रतकथा का वर्णन है। इसमें आरंभ में ही विष्णुजी और नारद का एक वार्तालाप आया है।
केनोपायेन चैतेषां दु:खनाशो भवेद् ध्रुवम् यानी किस उपाय से इनके दुखों का नाश हो सकता है। इसी उपाय को आजकल की भाषा में फंडा बोलते हैं। आज हर स्तर पर उपाय की आवश्यकता है। अर्जुन का उपाय श्रीकृष्ण थे, सुग्रीव का उपाय श्रीहनुमान रहे। बहुत छोटे-छोटे आध्यात्मिक उपाय बड़े-बड़े परिणाम दे देते हैं।
जब हम अशांत होते हैं तो शांति अपने आसपास या दूसरों से प्राप्त करने की कोशिश करते हैं। दूसरों पर मत टिकें, खुद पर रुकें। दूसरों में प्रवेश से अच्छा होगा, खुद के भीतर गहरे उतर जाएं। बहुत सूक्ष्म में जाने पर पाते हैं कि हमारी अशांति का कारण हम ही हैं।
इसलिए अशांति के दौर में अपना ही अवलोकन करें। अपने ही पर्यवेक्षक बन जाएं। अपने प्रति एक अनुसंधान की दृष्टि और वृत्ति रखें। यह छोटा सा उपाय स्वयं के प्रति तटस्थ दर्शन और दुनिया के प्रति तटस्थ भाव होगा। यहीं से आप कर्ता की जगह दृष्टा बन जाएंगे और यह उपाय शतप्रतिशत शांति दे जाएगा।
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महावीर स्वामी से जब पूछा गया साधु कौन हैं और असाधु कौन? उनका उत्तर था जो जागा
हुआ है वह साधु जो सोया हुआ है वह असाधु।
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